बिहारभूमि पोर्टल पर बंटवारा दाखिल-खारिज की नई व्यवस्था लागू, एक आवेदन से पूरे परिवार की जमाबंदी- (Date: 28-12-2025)
संवाददाता | पटना
राज्य में भूमि प्रशासन को सरल, पारदर्शी और विवादमुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहारभूमि पोर्टल पर बंटवारा दाखिल-खारिज की नई व्यवस्था लागू कर दी है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को अपने आवासीय कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इस नई व्यवस्था की घोषणा की।
विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि अब सहमति से होने वाले पारिवारिक भूमि बंटवारे की स्थिति में केवल एक ही आवेदन के माध्यम से पूरे परिवार के सभी हिस्सेदारों के नाम उनके हिस्से की जमीन पर जमाबंदी कायम हो सकेगी। पहले की व्यवस्था में हर हिस्सेदार को अलग-अलग दाखिल-खारिज कराना पड़ता था, जिससे लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारियों को व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए गए थे। प्रधान सचिव सीके अनिल के नेतृत्व में विभागीय टीम ने बहुत कम समय में नई तकनीकी व्यवस्था विकसित की, जिसे अब बिहारभूमि पोर्टल की दाखिल-खारिज सेवा के अंतर्गत लागू कर दिया गया है। इससे आम रैयतों को बड़ी राहत मिलेगी और पारिवारिक भूमि विवादों में भी कमी आएगी।
उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने पूर्वजों की भूमि का विधिवत बंटवारा कर डिजिटल माध्यम से अपने हिस्से की जमीन की जमाबंदी अपने नाम से अवश्य कराएं। विशेष रूप से उन्होंने उन परिवारों का उल्लेख किया, जहां अब तक मौखिक बंटवारे के आधार पर जमीन का उपयोग हो रहा है। ऐसे लोग इस नई सुविधा का लाभ उठाकर मौखिक बंटवारे को सरकारी अभिलेखों में दर्ज करा सकेंगे। मौखिक बंटवारा आगे चलकर भूमि विवाद का कारण बनता है और ऐसे मामलों में लोग कई सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं से भी वंचित रह जाते हैं।
एक सवाल के जवाब में विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जमीन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से ही भूमि सुधार जनकल्याण संवाद की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से जिलों में जाकर आम लोगों की समस्याओं को समझा जा रहा है और तय समय-सीमा में उनके समाधान का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल भूमि प्रशासन को जनोन्मुखी और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई व्यवस्था के तहत उत्तराधिकार-सह-बंटवारा की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इसमें पूर्वज की मृत्यु के बाद उनकी भूमि का बंटवारा करते हुए सभी उत्तराधिकारियों के नाम उनके हिस्से की जमीन पर अलग-अलग जमाबंदी एक साथ की जा सकेगी। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इसी वर्ष अगस्त-सितंबर में चलाए गए राजस्व महाअभियान के दौरान 46 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 40 लाख से अधिक आवेदन बंटवारा और उत्तराधिकार नामांतरण से संबंधित थे। इन सभी आवेदनों को 31 दिसंबर तक अपलोड कर लिया जाएगा और जनवरी से मार्च के बीच पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर उनका समाधान किया जाएगा।